america also prides itself on this rare star of jaunpur dr abhinavs

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जौनपुर के इस नायाब सितारे पर अमेरिका भी करता‌ है गुमान..!! डॉ अभिनव की लाजवाब रिसर्च

जौनपुर। आज हम आपको बताने जा रहे हैं सिकरारा थाना क्षेत्र के समसपुर गाँव निवासी अवधेश मौर्या और गायत्री देवी के पुत्र डॉक्टर अभिनव कुमार मौर्या द्वारा की गई एक लाजवाब रिसर्च के बारे में जो “यूनिवर्सिटी ऑफ़ लुइसविल, अमेरिका” में पौधों के बीज पर की गई प्रतिष्ठित रिसर्च “जर्नल ऑफ़ केमिकल इकॉलॉजी” में भी पब्लिश हुई है। इस रिसर्च से ये पता चला है कि पौधों के बीज भी जानकारियों का संग्रह कर सकते हैं और उसका उपयोग वे भविष्य में पौधा बनने पर अपनी सुरक्षा पर कर सकते हैं। इस रिसर्च में दो अलग प्रजातियों के पौधों के बीज को जब कीट खाते पौधों से निकलने वाली सुगंध दी गई तो वे आगे चलकर कीट प्रतिरोधी पौधों के रूप में विकसित हुए।

ये रिसर्च दुनिया में पहली बार बीजों के सुगंध को समझने और संग्रहित कर उनका कीट नियंत्रण में प्रयोग करने की क्षमता को प्रकाशित करता है। इस रिसर्च पर यूनिवर्सिटी ने अमेरिका में प्रोविज़नल पेटेंट भी फाइल कर दिया है।

 

डॉक्टर अभिनव अभी अमेरिका के कोलंबस शहर में स्कॉट्स मिरेकल ग्रो कंपनी नाम की फॉर्च्यून-500 कंपनी में रिसर्च साइंटिस्ट-ग्लोबल आर एंड डी के पद पर कार्यरत हैं।

बात की जाए डॉ अभिनव के शिक्षा की तो इनकी प्रारंभिक शिक्षा खपरहाँ के जनता इंटर कॉलेज में हुई फिर वह “बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी” के एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट से अंडरग्रेजुएट की डिग्री लेने के बाद आई आई एम, अहमदाबाद चले गए। बिज़नेस की पढ़ाई उन्हें ज़्यादा रास नहीं आई तो एक सीनियर प्रोफ़ेसर की सलाह पर अभिनव रिसर्च के लिए अमेरिका चले आए। अभिनव अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता एवं अपने गुरुजनों को देते हैं।

अभिनव बताते हैं कि उनके घर हमेशा से पढ़ाई का माहौल रहा है। उनके दादा ‘स्वर्गीय’ देवेन्द्रनाथ सिंह ने साल 1942 में बीएचयू से डॉक्टरी की पढ़ाई की और वे एक गोल्ड मेडलिस्ट डॉक्टर थे। इनके पिता अवधेश मौर्य ने बीएचयू से ही लॉ की पढ़ाई की और अभी जौनपुर कोर्ट में एडवोकेट हैं और बड़े पिताजी अशोक मौर्य डिस्ट्रिक्ट अकाउंट ऑफ़िसर के पद से रिटायर हुए हैं। अभिनव अभी कोलंबस ओहायो में स्थित अपनी लैब में अमेरिका के पब्लिक हेल्थ पेस्ट की रोकथाम के लिए रिसर्च कर रहे हैं। इन्हें इसी साल पब्लिक और एनिमल हेल्थ पेस्ट पर रिसर्च के लिए अमेरिका की एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट, यू.एस.डी.ए. और हेल्थ डिपार्टमेंट, एन.आई.एच. से रिसर्च के लिए तीन लाख डॉलर की ग्रांट भी मिली थी।

शहर के इस नायाब सितारे को हम सलाम करते हैं और निरंतर यह देश, प्रदेश व जिले का नाम रोशन करें यह कामना करते हैं।

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