March 2013

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Latest Stories

  • Addressing the Atrocities

    On March 8th, the students of Loyola College embarked on a fast demanding rights and justice for the Sri Lankan Tamils who are being treated brutally by the Sri Lankan army, the Tamils who have almost lost faith in God and who have forgotten the existence of peace. Agitations arose when the eight-member-ed team from Loyola […] More

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  • Page1- Trying to find Neverland

    What next? Argh. Don’t you just hate that question? I Got into Media College based on a decision I made during the last term of school. But that kind of easy last minute decision-making is not going to do it this time and I know that for sure. One year from now, I will be […] More

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  • The day before holi in school and the blue scalp!!

    There’s no escape,all efforts and techniques have failed by now.Thus surrender is the only option left,as scary faces approach,the last words which come out of every child’s mouth are “uniform pe mat dalna please”.   The day before holi in school is no less than a war,it used to be the day when we don’t […] More

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  • At the edge

    At the edge of anticipation, lie their eyes that flicker for sight And their minds that won’t rest at night. At the edge of the fear of rejection, lies the pathway to the sacred union of hearts, synonymous to happiness. At the edge of your tongue, lie the answers to the language of love unspoken […] More

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  • Guilty

    Guilt is a very small word with lots of meaning inside it. Sometimes this four letter word doesnt let people to live his entire life peacefully. As per me definition of guilt would be “a painful pinch inside your heart continously troubling you with every time your heart beats”. But with the same it is very relative […] More

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  • ग़ज़ल : समन्दर

    सभी को लगे खूब प्यारा समन्दर, सुहाना ये नमकीन खारा समन्दर, नसीबा के चलते गई डूब कश्ती, मगर दोष पाये बेचारा समन्दर,   दिनों रात लहरों से करता लड़ाई, थका ना रुका ना ही हारा समन्दर,   कई राज गहरे छुपाकर रखे है, नहीं खोलता है पिटारा समन्दर, सुबह शाम चाहे कड़ी दोपहर हो, हजारों […] More

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  • बसंत – गीत

    जब ऋतुराज विहँस आता है,तन-मन निखर-निखर जाता हैपुलकित  होकर  मन  गाता  है ,  प्यारा यह  मौसम भाता है  अमराई  बौराई  फिर से , हरियाली  लहराई फिर से, कोयल फिर उपवन में बोले, मीठी-मीठी मिश्री घोले,हृदय लुटाता प्रणय जताता, भ्रमर कली पर मंडराता है.      पुलकित होकर मन गाता है, प्यारा यह मौसम  भाता है. बाली […] More

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  • चंद – पंक्तियाँ

    1.  मेरी कीमत लगाता बजारों में था. वो जो मेरे लिए इक हजारों में था. कब्र की मुझको दो गज जमीं ना मिली, आशियाँ उसका देखो सितारों में था.  2.  लाखों उपाय दिलको मनाने में लग गए, तुमको कई जनम भुलाने में लग गए,   निकले थे घर से हम भी गुस्से में रूठ के,   कांटे तमाम वापस […] More

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  • ग़ज़ल : जिद में

    दिलों की कहानी बनाने की जिद में, लुटा दिल मेरा प्यार पाने की जिद में, बिना जिसके जीना मुनासिब नहीं था, उसे खो दिया आजमाने की जिद में, मिली कब ख़ुशी दुश्मनी में किसी को, ख़तम हो गया सब निभाने की जिद में, घुटन बेबसी लौट घर फिर से आई, रहा कुछ नहीं सब बचाने […] More

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  • भारत की सरकार में , शकुनी जैसे लोग

    भारत की सरकार में , शकुनी जैसे लोग,आम आदमी के लिए , नित्य परोसें रोग नित्य परोसें रोग , नहीं मिलता छुटकारा,ढूँढे  कौन  उपाय  ,  हुआ  मानव  बेचारा  महिलायें हर रोज , अपना मान हैं हारत, बदले रीति रिवाज, बदलता जाए भारत… More

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  • काँधे पे रखके अपनी ही लाश भागता है

      ‘बहरे मुजारे मुसमन अख़रब’ (221-2122-221-2122) दिन रात मुश्किलों का अब साथ काफिला है ‘ये कैदे बामशक्कत जो तूने की अता है ‘ आराम ना मयस्सर कुछ वक़्त का किसी को, कोई तमाम लम्हें फुर्सत से फांकता है, इंसान ये वही है जो मैंने था बनाया, ताज्जुब भरी नज़र से भगवान ताकता है, रस्मो रिवाज […] More

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