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ग़ज़ल : जिद में

दिलों की कहानी बनाने की जिद में,

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लुटा दिल मेरा प्यार पाने की जिद में,


बिना जिसके जीना मुनासिब नहीं था,

उसे खो दिया आजमाने की जिद में,


मिली कब ख़ुशी दुश्मनी में किसी को,

ख़तम हो गया सब निभाने की जिद में,


घुटन बेबसी लौट घर फिर से आई,

रहा कुछ नहीं सब बचाने की जिद में,  

 

तमाशा बना जिंदगी का हमेशा, 

शराफत से सर ये झुकाने की जिद में….

 

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Written by Arun Sharma

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