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AA thodi life chura lein

आ ज़िन्दगी के झमेलों से थोड़ी  life चुरा लें।

बिखर गयी थी जो खुशियाँ उन्हें फिर से सिमटा लें।

आ लेटें उसी पेड़ की छाव में,चल पड़ोस वाले बगीचे से आम चुरा लें।

बिखर गये थे जो ताश के पत्ते उन्हें समेट कर फिर से घर बनाते हैं।

आ  चल इस ज़िन्दगी को फिर से जीना सिखाते हैं।

चल फाड़ें उसी किताब के पन्ने आ नाव बनाते हैं।

हवाओं को  चीरता हुआ चले फिर से वो जहाज उड़ाते हैं।

आ चलें इस शहर की भीड़-भाड़ से दूर और एक नई दुनिया बसा लें।

कभी न टूटे जो,ऐसा कोई रिश्ता बना लें।

आ दौड़ें बारिश में नंगे पाव,फिर से मौसम का मजा उठा लें।

आ दादा-दादी के पास बैठ कर कहानियों का पिटारा खुलवा लें।

चल बाबा की कलाई को थामें सारे डरों को भगा दें।

आ मां को बोले की एक बार फिर से लोरी सुना दे।

आ फिर से स्कूल की दिवार पर S+T बनाते हैं।

आ दिल की पतंग को फिर से उड़ाते हैं।

आ फिर से मिटटी में पैसों को दबा दें।

चल आम के पेड़ के साथ पैसों का भी पेड़ लगा दें।

आ क्लास के आखिरी बेंच पर फिर से सो जाते हैं।

चल एक बार फिर से टीचर की डांट खाते हैं।

आ निकल गली में फिर से क्रिकेट की टीम बना लें।

पड़ोसियों की डांट को ही अपना म्यूजिक बना लें।

आ बैठें गली में दोस्तों के साथ और माहोल को खुशनुमा बना लें।

चल विडियो गेम की जीत को ही ज़िन्दगी की achievement  बना लें।

आ करे उन हसीं पलों को याद और आंसू का वो कतरा बहा लें।

फिर  नहीं आने वो दिन अब तो यादों का कारवां सजा लें।

आ लौट चलें गाव,गाडी को छोड़ साइकिल चलाते  हैं।

नये रिश्ते बनाने से पहले पुराने रिश्ते निभाते हैं।

जो खिलोने टूट गये थे कभी उन्हें फिर से ठीक कराते हैं।

चल उसी प्लास्टिक के track पर रेलगाड़ी दौड़ाते हैं।

चल घर में चीज़ों को इधर-उधर बिखराते है।

मां बाबा की डांट से बचने के लिए bed के नीचे छुप जाते हैं।

आ खोलें उसी किताब क पन्ने और ख़ुशी की स्याही से हर शब्द महका दें।

खाली पड़े पन्नों पर उन लम्हों की तस्वीर सजा दें।

चल चलें उसी तालाब के किनारे और कुछ पत्थर भी उठा लें।

क्या पता वो लहरें ही उन लम्हों का एहसास करा दें।

laptop पर मूवी तो बहुत देख ली चल आज matinee लगाते हैं।

छोड़ सब काम आज फिर से दूरदर्शन की दुनिया चलाते हैं।

आ चल मिल कर वक़्त को आवाज़ लगते हैं।

जब देखो भागता रहता है आज इसे भी जीना सिखाते हैं।

आ ज़िन्दगी की गाडी में पहिया लगा लें।

reverse gear लगायें और उसी राह पर उल्टा भगा लें।

चल सपनों की दुनिया में फिर से एक गौता लगा लें।

हर वक़्त से वाकिफ हैं ये आंखें इन्हें भी थोडा सुकून दिला दें।

चल उठा पिचकारी फिर से होली मनाते हैं।

चल सब  के गालों पर फिर से रंग लगाते हैं।

जो रिश्ते कभी टूट गये थे उन्हें फिर से जोड़ आते हैं।

दो पलों की है ये ज़िन्दगी ऐसा ही सभी बतलाते हैं।

आ ज़िन्दगी के झमेलों से थोड़ी life चुरा ले।

समाज की रस्मों को तौड़ आज दोस्ती को ही अपना धर्म बना लें।

 

source-http://www.motivationredefined.com

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Written by Sahil

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