महंत किसे कहते हैं ? वर्तमान काल में हम ऋषि, मुनि, साधु, संन्यासी, संत और महंत में अंतर करना भूल चुके हैं। महंत को हम अक्सर संत मान लेते हैं जबकि महंत किसे कहते हैं इसे जानने के लिए हमें वाल्मीकि रामायण , महाभारत और दूसरे महान हिंदू ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए । वास्तव में महंत एक पद होता है जो किसी धार्मिक संस्थान का प्रशासनिक प्रमुख होता है और उस धार्मिक संस्थान के सारे वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों की देख रेख करता है। महंत होने के लिए तपस्या करने की कोई जरुरत नहीं होती है। ये एक प्रकार से धार्मिक राजनैतिक पद होता है जो किसी को भी दिया जा सकता है । आमतौर पर किसी ब्राह्म्ण को ही किसी धार्मिक न्यास या संस्थान का प्रमुख बनाया जाता है ।
महंत बनने से किसी प्रकार के पुण्य की प्राप्ति नहीं होती है। वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड में एक महंत और कुत्ते की कथा आती है। कथा के अनुसार एक दिन एक कुत्ता श्रीराम के पास अपनी फरियाद लेकर जाता है। उस कुत्ते के सिर पर बड़ी गहरी चोट लगी थी। श्रीराम ने जब उससे पूछा कि उसे ये चोट कैसे लगी तो उस कुत्ते ने बताया कि रास्ते में एक भिक्षुक ने उसे अकारण मारा है । श्रीराम ने जब उस भिक्षुक से कुत्ते को मारने की वजह पूछी तो भिक्षुक ने अपनी गलती स्वीकार की और श्रीराम से कुत्ते को न्याय देने के लिए कहा।
श्रीराम ने उस कुत्ते से पूछा कि इस भिक्षुक को क्या दंड देना चाहिए तो कुत्ते ने कहा कि इस भिक्षुक को वो कालंजर मठ का महंत बना दें। श्रीराम भी कुत्ते के इस दंड विधान को सुनकर आश्चर्य में पड़ गए। तब कुत्ते ने श्रीराम को बताया कि पूर्वजन्म में वो भी कालंजर मठ का महंत था। चूंकि महंत किसी मंदिर या धार्मिक संस्थान का प्रमुख होता है इसलिए वो देवताओं की संपत्ति का दुरुपयोग अपनी सुविधाओं के लिए करता है और इस प्रकार वो पाप का भागी होता है। कुत्ते ने बताया कि पूर्वजन्म में महंत होने की वजह से उसने जो भ्रष्टाचार किया था उसी के पाप की वजह से उसे इस जन्म में कुत्ता बनना पड़ा।
कुत्ते ने कहा कि इस भिक्षुक को महंत बना देने से ये भी भ्रष्टाचार करेगा और देवताओं के अँश का दुरुपयोग करेगा और अगले जन्म में ये भी कुत्ता बनेगा। श्रीराम ने उस कुत्ते की बात मान कर उस भिक्षुक को कालंजर मठ का महंत बना दिया।
लेकिन सभी महंत भ्रष्टाचार करते हैं ऐसा नहीं है । कई महंत देवताओं के अँश और संपत्ति का उपयोग समाज के कल्याण के लिए भी करते हैं। ये कथा उन महंतों के लिए है जो भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं। सभी महंत अगले जन्म में कुत्ता ही बनते हैं ऐसा नहीं है।
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