Feed Import (09 October 2017)

TUSHAR GARG
TUSHAR GARG
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आज फिर एक दफ्न

याद की कोख से

 का अंकुर फूटा

मानों धरती के आगोश में

एक ज्वालामुखी छुपा हो

जो फट पड़ा हो

जब उसके सब्र का बांध

डगमगा गया हो

यही होता है अमूमन


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