अमूल सक्सेस स्टोरी : टेस्ट ऑफ़ इंडिया

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यह पूरी तरह से, मक्खनयुक्त, स्वादिष्ट है! हां, आपने सही अनुमान लगाया, इस ब्लॉग में अमूल की सफलता की कहानी Amul Success Story की बात करेगें। अमूल ने भारत को दुनिया के सबसे बड़ा दूध उत्पादक का दर्ज़ा प्रदान करने में अहम् भूमिका निभाई है। यह हमें दूध से लेकर स्वादिष्ट दूध से बने हर उत्पादों तक, हमारी जरूरत की हर चीज को पूरा करती है! तो यह सही है कि हम इस अमूल की अविश्वसनीय सफलता की कहानी के बारे में जानें।

बेहद बटरली स्वादिष्ट,अमूल। हर अमूल बटर पैक पर हम इस जिंदादिल अमूल गर्ल को कैसे भूल सकते हैं? पिछले कुछ वर्षों में, अमूल ने अपने शीर्ष गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पादों और अनूठी मार्केटिंग रणनीति Unique Marketing Strategy के साथ हमारे दिलों में जगह बनाई है! अमूल मिल्क, अमूल बटर, अमूल चीज़, क्रीम, चॉकलेट और आइसक्रीम आपको आनंद से भर देते हैं! यह सबके लिए एक भरोसेमंद ब्रांड बन गया है। 

हम अमूल के उत्पाद खरीदने से पहले दो बार नहीं सोचते,उसे फ़ौरन खरीद लेते है,लेकिन जिस तरह सोना बनने से पहले सोने को आग में जलना पड़ता है,उसी तरह अमूल को भी भारत का पसंदीदा डेयरी ब्रांड बनने से पहले कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा! Dr. Verghese Kurien जैसे कई लोगों ने अमूल को वह स्थान देने के लिए ईमानदारी से प्रयास किए हैं,जहां वह आज है। इसके बारे में हम इस अमूल की केस स्टडी Learnings From Amul Case Study में जानेंगे ।

अमूल का इतिहास!

उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक और पश्चिम से लेकर पूर्व तक,जो एक चीज़ आपको सभी घरों के किचन में मिल जाएगी, वो है। अमूल मक्खन,अमूल मक्खन बनाने वाली अमूल डेयरी के बनने की कहानी भी प्रेरणा से भरी है इस डेयरी की शुरुआत एक छोटे से गांव में हुई| आज़ादी से पहले किसानों के शोषण को देखते हुए अमूल Amul Case Study Solution कंपनी की स्थापना की गई। इसे दूसरे ब्रैन्ड्स से कड़ी टक्कर भी मिली, लेकिन आज भी देश के लगभग हर घर में अमूल  के प्रोडक्ट्स इस्तेमाल किए जाते हैं। 

अमूल एक सहकारी दुग्ध उत्पाद कंपनी Cooperative Milk Products Company  है. AMUL का पूरा नाम आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड है इसकी स्थापना 1946 में स्वतंत्रता सेनानी त्रिभुवनदास पटेल Fighter Tribhuvandas Patel के सहयोग द्वारा की गई. दरअसल, 1940 के दशक में गुजरात में व्यापारियों द्वारा दूध उत्पादक किसानों का खूब शोषण किया जाता था।उस वक़्त की मुख्य डेयरी पोलसन Dairy Polson के एजेंटों द्वारा कम दामों में किसानों से दूध खरीदकर महंगे दामों में बेचा जा रहा था। 

इस समस्या से निजात दिलाने के लिए किसानों ने वहां के स्थानीय नेता त्रिभुवनदास पटेल से संपर्क साधा,उन्होंने अपने लोगों के साथ सरदार वल्लभ भाई पटेल Sardar Vallabh Bhai Patel से मुलाकात की,सरदार पटेल ने समाधान करने के लिए मोरारजी देसाई Morarji Desai को गुजरात भेजा उन्होंने हालात का जायजा लिया फिर साल 1945 में बॉम्बे सरकार ने बॉम्बे मिल्क योजना Bombay Milk Scheme शुरू की।

कैसे हुई अमूल की शुरुआत

साल 1949 में त्रिभुवन भाई पटेल ने डॉक्टर वर्गीज कुरियन Dr. Verghese Kurien से मुलाकात कर इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए राजी किया,दोनों ने सरकार की मदद से गुजरात के दो गांवों को सदस्य बनाकर डेयरी सहकारिता संघ Dairy Cooperative Federation की स्थापना की| वर्गीज कुरियन सहकारिता संघ को कोई आसान नाम देना चाहते थे जो आसानी से जुबान पर आ जाए कुछ कर्मचारियों ने इसका नाम संस्कृत शब्द अमूल्य सुझाया जिसका मतलब अनमोल होता है, जो बाद में अमूल के नाम पर रखा गया। शुरुआत में कुछ किसानों द्वारा डेयरी में 247 लीटर दूध का उत्पादन किया जाता था,प्रतिदिन दो बार गांव वालों से दूध इकट्ठा किया जाता था| इसके लिए गांव में कई सहकारी समितियों का गठन किया गया था, किसानों को दूध का भाव दूध और उसके फैट के हिसाब से दिया जाता था,1948 के अंत तक 432 गांव के किसान संघ Farmer's Association से जुड़ गए जिससे दूध के उत्पादन की क्षमता बढ़कर 5000 लीटर प्रतिदिन पहुंच गई साल 1955 में वर्गीज कुरियन दुनिया के पहले ऐसे व्यक्ति बने जिन्होंने भैंस के दूध से पाउडर बनाया इससे पहले गाय के दूध से ही पाउडर बनाया जाता था। 

मिल्कमैन ऑफ इंडिया Milkman of India (Dr. Kurien) 

गुजरात में सफल होने के बाद अमूल पूरे देश में अपना झंडा गाढ़ना  चाहती थी 31 अक्टूबर 1964 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री को कैटल फील्ड प्लांट Cattle Field Plant to the Prime Minister Late Lal Bahadur Shastri (पशुपालन संयंत्र) के उद्घाटन के लिए आनंद शहर में आमंत्रित किया गया था वे सहकारी संघ की पूरी प्रक्रिया से बहुत प्रभावित हुए उन्हें उसी दिन वापस भी आना था लेकिन उन्होंने वहां रुकने की ठानी और को ऑपरेटिव की इस सफलता का जायजा लिया  उन्होंने पाया कि अमूल से जुड़े किसान की आर्थिक हालात बेहतर थे ऐसे में लाल बहादुर शास्त्री ने इस आधार पर देश के किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने का फैसला लिया उन्होंने Dr. Verghese Kurien  से देशभर में इस प्रतिरूप को अमल करने के लिए कहा। 

इसके बाद साल 1965 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड National Dairy Development Board की स्थापना की गई जिसका अध्यक्ष डॉ0 वर्गीज कुरियन को बनाया गया. डॉ0 कुरियन की अध्यक्षता में भारत दुग्ध उत्पादन में नंबर वन बनने की राह पर चलने लगा इसके लिए धन एकत्र करने की जरूरत थी. कुरियन ने वर्ल्ड बैंक से कर्जा देने की मांग की 1969 में जब वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष भारत दौरे पर आए थे तो डॉ0 कुरियन ने उनसे मुलाकात की उन्होंने उनसे कहा कि ‘आप मुझे धन दीजिये और फिर उसके बारे में भूल जाइए (दूध उत्पादन की कमी)’उसके कुछ दिनों बाद बिना किसी शर्त के वर्ल्ड बैंक world bank कर्जा देने के लिए राजी हो गया।

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Amul Success StoryAmul Case StudyUnique Marketing Strategy

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