Jagannath Puri Rath Yatra 2021 [Hindi]: श्री जगन्नाथ के मन्दिर में छुआछूत क

Jagannath Puri Rath Yatra 2021 [Hindi]: श्री जगन्नाथ के मन्दिर में छुआछूत क्यों नहीं है?

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Last Updated on 12 July 2021, 12:17PM IST: Jagannath Puri Rath Yatra 2021 Hindi: आज पाठक गण जानेंगे “जगन्नाथ धाम रथ यात्रा” के बारे में। साथ में जानेंगे जगन्नाथ धाम से जुड़ी बहुत सी ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में।

जगन्नाथ धाम रथ यात्रा विशेष 2021: मुख्य बिंदु

12 जुलाई से प्रारंभ हो रही है जगन्नाथ रथयात्रा।कालांतर से चले आ रहे प्रचलन का सीधा प्रसारण।रथ पर सवार कृष्ण, बलराम और सुभद्रा करेंगे भ्रमण।जगन्नाथ रथ यात्रा पर इतिहास के पृष्ठों से विशेष विवेचन।आखिर क्यों हैं जगन्नाथ पुरी की मूर्तियां अधूरी?किस प्रकार हुई जगन्नाथ मंदिर में छुआछूत खत्म?

Jagannath Puri Rath Yatra 2021 Date

यह यात्रा भारत के उड़ीसा राज्य के पुरी क्षेत्र जिसे पुरुषोत्तम पुरी, शंख क्षेत्र, श्रीक्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है, में निकाली जाती है। हिंदी पञ्चाङ्ग के अनुरूप आषाढ़ माह, शुक्ल पक्ष, द्वितीया (12 जुलाई) से प्रारंभ होकर जगन्नाथ रथ यात्रा देवशयनी एकादशी (20 जुलाई) को समाप्त होगी।

कोरोना महामारी का Jagannath Puri Rath Yatra 2021 पर पड़ा असर

पिछले वर्ष लगाई गई पाबंदियां इस वर्ष भी जारी रहेंगी। लोग अपने घरों से टेलीविजन पर सीधा प्रसारण देख सकेंगे। कड़ी शर्तों के साथ पुरी में जगन्नाथ यात्रा शुरू हो गई है। यात्रा में अधिकतम 500 लोगों को ही रथ खींचने के आदेश हैं। दूसरी ओर नगर में कर्फ्यू की स्थिति है एवं जनता अपने निवास स्थान से सीधा प्रसारण देखेंगे। प्रशासन सतर्क एवं तैयार है। मुख्य सचिव, महानिदेशक एवं अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी स्थितियों पर ध्यान देंगे।

क्यों निकाली जाती है जगन्नाथ यात्रा

मान्यता है कि इस दिन जगन्नाथ भगवान मंदिर से निकलकर गुंडिचा के मंदिर में विश्राम करने जाते हैं तथा देवशयनी एकादशी के दिन वापस लौटते हैं। लोकवेद के अनुसार भगवान कृष्ण अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ भ्रमण करने निकलते हैं। इस दिन लोग बहुतायत में दर्शन के लिए एकत्रित भी होते हैं तथा संकट के निवारण की इच्छा भी रखते हैं। हालांकि यह सभी कुछ तत्वज्ञान के अभाव का नतीजा है। सबसे आगे बलभद्र जी की मूर्ति का रथ चलता है जिसे तालध्वज कहा जाता है, फिर सुभद्रा जी की मूर्ति का रथ होता है जिसे पद्म रथ कहते हैं तथा अंत में कृष्ण जी की मूर्ति का रथ होता है जिसे नंदी घोष कहते हैं।

मान्यता के अनुसार गुंडिचा मंदिर भगवान कृष्ण की मौसी का घर है जहाँ पांचवे दिन लक्ष्मी जी ढूंढते हुए आती हैं जिन्हें देखकर कृष्ण जी दरवाजा बंद कर लेते हैं इस कारण क्रोध में आकर लक्ष्मी जी रथ का पहिया तोड़ देती हैं तथा ‘ हेरा गोहिरी साही पूरी’ नामक लक्ष्मी मंदिर में वपास लौट जाती हैं। बाद में लक्ष्मी जी को मनाने का भी रिवाज है। स्वयं विचार करें इतने शक्तिशाली देव विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण, क्या उन्हें कहीं भी जानें के लिए सहारे की आवश्यकता है? क्या लक्ष्मी जी सदैव विष्णु जी के साथ नहीं रहतीं? क्या यह रिवाज रंगमंच की प्रस्तुति की भांति वेदों और गीता के ज्ञान को धता बताकर कोरा अज्ञान नहीं है? वास्तव में ये कथा भी पूर्ण सत्य नहीं है। आज हम जानेंगे जगन्नाथ पुरी की रथयात्रा का इतिहास

Jagannath Puri Rath Yatra 2021: जगन्नाथ सृजन की कथा

Jagannath Puri Rath Yatra 2021 Hindi: उड़ीसा प्रान्त में एक राजा इन्द्रदमन का राज्य था। वे श्री कृष्ण के एकमेव अनुरागी थे। राजा ने कृष्ण जी से स्वप्न में साक्षात्कार किया जिसमें श्रीकृष्ण ने एक मंदिर बनाने और उसमें गीता उपदेश की इच्छा व्यक्त की। राजा इन्द्रदमन ने आदेश अनुसार मंदिर बनाया लेकिन समुद्र ने हर बार मंदिर तोड़ने की प्रक्रिया जारी रखी। इस प्रकार 5 बार तक देव सदन टूट गया। राजा हताश होकर बैठ गए और पुनः मंदिर न बनवाने का निर्णय लिया। राज कोष रिक्त हो चला था। कबीर परमेश्वर ने ज्योति निरंजन (काल/ ब्रह्मा, विष्णु, महेश के पिता) को मंदिर निर्माण के लिए वचन दिया था। वचनानुसार कविर्देव राजा इन्द्रदमन के समक्ष सामान्य रूप में प्रकट हुए एवं मंदिर बनाने का आग्रह किया किन्तु राजा कृष्णजी को सर्वोपरि कहते हुए मना किया कि जब कृष्ण जी ही अम्बुज को नहीं रोक पाए तो कौन रोक सकता है भला।

यह सुनकर कबीर साहेब ने अपने रहने का स्थान बताकर वहां से प्रस्थान कर गए। राजा ने स्वप्न में पुनः श्री कृष्ण का साक्षात्कार किया और श्री कृष्ण ने कहा कि वे सन्त साधारण सन्त नहीं हैं तथा अनन्य भक्ति के स्वामी हैं। आदेश पाकर राजा इन्द्रदमन ने कविर्देव से पुनः प्रार्थना की। कविर्देव आये और एक चबूतरे का निर्माण करवाया जिस पर बैठकर उन्होंने भक्ति की। मंदिर बनते ही पुनः समुद्र का आगमन हुआ किंतु कबीर परमेश्वर ने उसे हाथ उठाकर रोक दिया।

समुद्र क्यों नहीं बनने देना चाहता था देवालय?

कबीर साहेब से समुद्र ने आगे बढ़ने की विनती की किन्तु कबीर साहेब ने उसे वहीं रोका और दूर जाने के लिए कहा। समुद्र अपमान से भरा हुआ था क्योंकि श्रीराम ने धनुष उठाकर त्रेतायुग में उसे हटने के लिए कहा था। तब  कबीर साहेब ने उसे कहा कि आप मंदिर को नही तोड़ पाओगे। समुद्र देव के प्रार्थना करने पर कबीर साहेब ने उसे अपना बदला द्वारिका को डुबोकर लेने के लिए कहा। तब समुद्र वहा से पीछे हट गया और द्वारिका जाकर उसने  विध्वंस मचाया। मंदिर निर्माण कार्य के समय एक नाथपंथी सिद्ध वहां आये और मंदिर में मूर्ति की स्थापना का आदेश दिया। राजा इन्द्रदमन ने प्रार्थना की और उन्हें अपने स्वप्न के आदेश से अवगत कराया। सिद्ध ने स्वप्न को नकारते हुए मूर्ति रखने का आदेश दिया। राजा ने श्राप के भयवश मूर्तियों के निर्माण का आदेश दिया। किन्तु जैसे ही मूर्ति बनकर तैयार होतीं स्वतः ही खंडित होकर गिरने लगतीं।

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राजा पुनः संकट में निराश हो चले। तब कविर्देव पुनः एक जीर्ण शरीर धारी मूर्तिकार के रूप में राजा के समक्ष प्रकट हुए। राजा से अनुमति लेकर एक बंद कमरे में मूर्तियों का निर्माण करने लगे। किंतु यह शर्त रखी कि कोई भी मूर्ति बनने के पहले उनका ध्यान भंग नहीं करेगा। बारह दिनों के पश्चात नाथपंथी सिद्ध महात्मा पुनः आये और मूर्तियों के विषय मे पूछा। बंद कमरे में बारह दिनों से मूर्ति का निर्माण जानकर उन्होंने जबरजस्ती पट खुलवाए और वहां तीन मूर्तियां, जैसे निर्णय लिया गया था कृष्ण, बलराम, सुभद्रा की, पाई गईं। लेकिन उनके हाथ और पैर के पंजे नहीं थे। और वृद्ध रूप में कविर्देव भी अंतर्ध्यान हो गए थे। कृष्ण की वांछा जानकर और नाथपंथी सिद्ध की हठ से मूर्तियों की ज्यों की त्यों स्थापना कर दी गई।

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आज भी मंदिर जाने वाले श्रद्धालु और पंडित इस सत्य से अनजान हैं वे हर प्रश्न को जगन्नाथ की लीला वाक्यांश से उत्तर देते हैं। अपने मन से बनाई गई कथा कहानियों का वास्ता देते हैं जिनका कोई शास्त्र सम्मत प्रमाण भी नहीं है और न ही सत्य है। वहाँ पर ऐसे प्रमाण आज भी हैं, जिस पत्थर (चबूतरा) पर बैठ कर कबीर परमेश्वर जी ने मन्दिर को बचाने के लिए समुद्र को रोका था वह आज भी विद्यमान है। उसके ऊपर एक यादगार रूप में गुंबज बना रखा है। वहाँ पर बहुत पुरातन महन्त (रखवाला) परम्परा से एक आश्रम भी विद्यमान है।

Content Credit: Jagannath Puri Rath Yatra in Hindi by SA News Channel

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